देश सेवा के लिए युवाओं को प्रेरित कर रहा सरकारी नौकरी छोड़ एक ‘सैनिक’

कामठी जो कभी अंग्रेजों की छावनी थी और उसका देश की आजादी के साथ एक अनोखा रिश्ता है।
राकेश फेंडर. नागपुर/कामठी.
कामठी स्थित पोरवाल कालेज का मैदान। धूप हो या बारिश सेना में भर्ती का प्रशिक्षण यहां निरंतर चलता रहता है। आज भी लगभग 42 युवक-युवतियां प्रशिक्षणार्थी के रूप में पसीना बहाते देखे जा सकते हैं। खास उद्देश्य के साथ इस ‘प्रशिक्षण’ को शुरू किया है कामठी के ही एक सैनिक ने। फिलहाल वे स्वैच्छिक सेवानिवृति ले चुके हैं। कामठी के मच्छीपुल शास्त्री चौक निवासी चंद्रशेखर उर्फ बब्बू अरगुलेवार (46) वर्ष 1993 में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में भर्ती हुए। मुश्किलों का सामना करते हुए सेना में भर्ती होने का सपना साकार किया। राजस्थान, उत्तरप्रदेश, ओडिशा, मंुबई आदि स्थानाें पर ड्यूटी के दौरान कार्यकुशलता का परिचय दिया। छुटि्टयों में जब घर आते तो मित्र और आस-पड़ोस के युवा अनुभव पूछते।
चंद्रशेखर ने गंभीर होकर सोचा कि कामठी जो कभी अंग्रेजों की छावनी थी और उसका देश की आजादी के साथ एक अनोखा रिश्ता है। कामठी के युवाओं में एक जोश है, देश के प्रति जज्बा है। सेना या पुलिस में भर्ती होकर वे अपने देश और समाज की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन पैसे की कमी या फिर प्रशिक्षण के अभाव में सपना साकार नहीं कर पा रहे हैं। चंद्रशेखर के मन में यह बात खटकती रही और अंतत: एक दिन उन्होंने ठान लिया कि सेना में रहते हुए जो अनुभव और प्रशिक्षण उन्होंने पाया है, उसे कामठी के युवा-युवतियों के साथ साझा करेंगे। इसके बाद तो उन्होंने सीआईएसएफ जैसी सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का मन बना लिया। पत्नी, माता-पिता व अन्य रिश्तेदारों ने काफी विरोध किया, लेकिन मार्च 2017 को उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और तब से कामठी के युवा-युवतियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। लिखित परीक्षा की भी तैयारी करा रहे हैं। प्रशिक्षणार्थियों के जज्बे को देखकर वे कहते हैं कि देशप्रेम के लिए युवाओं में जबर्दस्त जोश है। with thanks from bhaskar.com