पहले मणिपुर और गोवा के बाद अब विहार विधानसभा में सरकार

नई दिल्ली. ए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में पदार्पण के बाद से कांग्रेस को पहले केंद्र से और फिर एक-एक कर राज्यों की सत्ता से बाहर कर रही भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में जनता दल (यू) के साथ सरकार बनाकर अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी को एक और झटका दिया है. कुछ समय पहले मणिपुर और गोवा और अब बिहार में भाजपा ने सरकार बनाने के मौके को जिस तेजी से लपका, उससे साफ है कि वह ज्यादा से ज्यादा राज्यों में खुद या अपने सहयोगियों के साथ सत्ता पर कब्जा कर ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के अपने लक्ष्य को यथाशीघ्र हासिल करना चाहती है. बिहार में सरकार बनाने के साथ ही भाजपा ने उत्तरी, पश्चिमी और कुछ पूर्वी राज्यों में अपनी पकड़ और बढ़ा ली है. पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली को छोड़कर उत्तऱ-पश्चिम भारत पर अब भाजपा का कब्जा हो गया है. कांग्रेस के पास सिर्फ पंजाब और हिमाचल प्रदेश हैं जबकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है. देश में अब सिर्फ पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मिजोरम, मेघालय और पुड्डुचेरी में कांग्रेस की सरकार है. इनमें से हिमाचल प्रदेश मेें इस वर्ष के अंत में चुनाव होने हैं. राज्य में भाजपा और कांग्रेस का बारी-बारी से चुनाव जीत कर सरकार बनाने का रिकॉर्ड है. इस लिहाज से इस बार भाजपा की बारी है. इस वर्ष के शुरू मेें पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में गोवा और मणिपुर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. वह दोनों राज्यों में सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू कर पाती, उससे पहले ही भाजपा सक्रिय हो गयी. उसने दोनों राज्यों में छोटे दलों को साथ मिलाकर सरकार का गठन कर लिया और कांग्रेस हाथ मलती रह गयी. वह संविधान और नैतिकता की दुहाई देती रही और उसके हाथ से दो राज्य फिसल गये. भाजपा उत्तराखंड में पिछले चुनाव में शानदार सफलता हासिल करने से पहले ही राज्य में कांग्रेस की सरकार गिराने में सफल हो गयी थी लेकिन उच्चतम न्यायालय के फैसले से कांग्रेस की सरकार बच गयी थी. उसके कुछ समय बाद हुये चुनाव में उसे भाजपा के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा.
पहले से लिखी गई थी बिहार की पटकथा
बिहार में जिस तरह आनन-फानन में नीतीश कुमार का इस्तीफा और भाजपा के साथ उनकी नई सरकार बनी, उससे लगता है कि इसकी पटकथा पहले से लिखी हुयी थी या फिर भाजपा वहां भी जल्द से जल्द वैकल्पिक सरकार का गठन करना चाहती थी ताकि कांग्रेस तथा राष्ट्रीय जनता दल को कोई और रास्ता निकालने का मौका न मिलने पाये.
तीन घंटे के अंदर भाजपा ने स्वीकारा नीतीश का नेतृत्व
देश के इतिहास में ऐसा शायद ही देखने में आया हो जब किसी मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने के महज 16 घंटे के अंदर ही फिर से सरकार बना ली हो. नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के तीन घंटे के अंदर ही भाजपा ने उनके नेतृत्व को स्वीकार करते हुए उन्हें सरकार बनाने के लिए बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा कर दी. इसके बाद मुख्यमंत्री आवास में जदयू और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विधायकों की बैठक हुई, जिसमें श्री कुमार को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया. इसके बाद रात्रि 12 बजे श्री कुमार ने भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी और समर्थक विधायकों के साथ राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया और आज सुबह उन्हें शपथ दिला दी गई .






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