मायावती ने दलितो का मूर्ख बनाया, नसीमुउदीन ने कट्टरता को पोसा

विष्णुगुप्त
मायावती दौलत की रानी है तो नसीमुउदीन भी कम नहीं है। मायावती ने दलितों के नाम अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश की थी। गेस्ट हाउस कांड के बाद भी मायावती को सत्ता मिलने की उम्मीद नहीं बनी। फिर मायावती ने उफान और हिंसक दलितवाद को लात मार दिया और सर्व जिन हिताय, सर्वजन सुखाय का गीत गाने लगी। दलितों को भी मूर्ख बनाया… यूपी में पांच साल के शासनकाल में मायावती ने दलितों के साथ न्याय नहीं की और न नौकरियों में खाली पदों पर भर्ती का कोई अभियान चलायी। दलितों में अनेक जातियां है, जिसमें खटिक, पासवान और धोबी आदि हैं। पर मायावती ने सर्फि अपनी जाति का ही थोडा बहुत विकास किया।……. नसीमुउदीन की कोई अपनी औकात नहीं थी। सर्फि मुस्लिमवाद से उसकी राजनीति नहीं चलती, विधायक नहीं बनता। बसपा में शामिल हो गया। दलित वोट मिले तब जाकर वह विधायक बना। पर उसने यह स्थापित कर दिया कि वह मुस्लिम वोटों पर जीता है और पश्चिम उत्तर प्रदेश में जो बसपा का जनाधार है वह उसके कारण है।……… उगाही खोर और हिंसक व्यक्ति………… नसीमुउदीन न केवल उगाही खोर है बल्कि हिंसक और अमानवीय मानसिकता का भी सहचर है। बसपा में रहते हुए उसने अरबों की संपत्ति बनायी है। दयाशंकर सिंह के प्रकरण में उसने उनके बच्चों के प्रति कैसी टप्पिणी की थी और नर्लिजता दिखायी थी, यह भी जगजाहिर है।……. जैसा को तैसा मिला………. मायावती जब मुसलमानों के नाम पर अपराधी और हिंसक मानसिकता के परिचायक लोगों को साथ लेगी तो उसका दुष्परिणाम तो ऐसा ही होगा। खासकर पश्चिम उत्तर प्रदेश में नसीमुउदीन ने बसपा की नैया डूबाने में बडी भूमिका निभायी है। बसपा को इस्लाम का प्रतीक बना डाला। कट्टरवादी और अपराधी कस्मि के मुसलमानों का संरक्षण दिया। यही कारण है कि हन्दिू वोट बसपा खिसक गये।…….. नसीमुउदीन भी झूठा है………… मायावती ने जब नसीमुउदीन को पार्टी से बाहर कर दिया तभी नसीमुउदीन मायावती के खिलाफ खडा हुआ। अगर वह ईमानदार होता तो फिर बसपा से बाहर निकाले जाने के पूर्व ही मायावती की वह सच्चाई बता देता।……….. एक-दूसरे के पोल खोंलेगे………. मायावती और नसीमउीन एक दूसरे के पोल खोलेंगे। एक-दूसरे के लूट वाली कहानियां बतायेंगे। जनता यह जानेगी कि मायावती और नसीमुउदीन कितने बडे भ्रष्ट और लूटरे हैं।…….. मायावती का खेल समाप्त…… यह प्रकरण में मायातवी को ही नुकसान हुआ है, उसकी ही पोल खुली है। नसीमुउीन किसी न किसी दल में चला जायेगा। पर मायावती की छवि एक बार खराब हुई है। अब जनता मायावती पर कैसे विश्वास करेगी।  -वरिष्ठ पत्रकार विष्णुगुप्त के फेसबुक पेज से साभार






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