वरुण गांधी बोले- मुझे फूलों से स्वागत पसंद नहीं, फूल तो मृत होते हैं

अगर आप तेज जाना चाहते हैं, तो बेशक अकेले चलिए, मगर आप दूर जाना चाहते हैं तो सबके साथ चलिए।
टॉक शो में सांसद वरुण गांधी ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ पर साझा किए विचार
नागपुर. वो वक्त गया जब आम आदमी के पास अपनी आवाज उठाने के लिए ज्यादा माध्यम नहीं थे। जमाना बदल गया है। अब युवाओं के पास सूचना का अधिकार (आरटीआई), जनहित याचिका (पीआईएल), सोशल मीडिया जैसे अमोघ अस्त्र है। युवाओं से सीधे मुखातिब वरुण गांधी ने कहा- इसके उपयोग से आप न सिर्फ अपनी, बल्कि पूरे समाज की तस्वीर बदल सकते हैं। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से युवा भाजपा सांसद वरुण गांधी ने शुक्रवार को आयोजित दैनिक भास्कर के टॉक शो में युवाओं से संवाद साधा। शुक्रवार शाम सिविल लाइंस स्थित देशपांडे सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने “राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ पर बात की।
– इस दौरान वरुण गांधी कहा, मुझे फूलों से स्वागत पसंद नहीं है, क्योंकि फूल मुरझाए हुए रहते हैं। पौधे देकर किया जानेवाला स्वागत अच्छा लगता है, क्योंकि पौधे जीवन और संभावनाओं के प्रतीक होते हैं।
– सांसद ने कि युवा एकजुट होकर ही देश की तस्वीर बदल सकते हैं। उन्होंने कहा-अगर आप तेज जाना चाहते हैं, तो बेशक अकेले चलिए, मगर आप दूर जाना चाहते हैं तो सबके साथ चलिए। कंधों पर गरीबों को भी लेकर बढ़िए।
देश युवा, मगर राजनीति बूढ़ी
– सांसद वरुण गांधी ने राजनीति में नौजवानों की सहभागिता पर कहा कि भारत देश वर्ष 2020 तक दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र होगा। मगर दिक्कत ये है कि देश की राजनीति बूढ़ी हो चली है।
– देश की संसद के पहले सत्र (1952) मंे जहां भारत के नागरिक की औसत उम्र 38 वर्ष थी, सांसद की औसत उम्र 45 वर्ष थी, वहीं वर्ष 2017 में देश के नागरिक की औसत उम्र 24 वर्ष है, सांसद की औसत उम्र 59 वर्ष है।
कुछ ऐसे युवाओं की कहानी, जिन्होंने अनेकों का जीवन बदला
– वरुण गांधी ने समाज की विविध समस्याओं और उनके समाधान में युवाओं की भूमिका के कुछ प्रेरक किस्से प्रस्तुत किए। पढ़िए, और सोचिए कि आप किस तरह समाज के काम आ सकते हैं।
#जल –
– एशिया की सबसे बड़ी झुग्गीबस्ती धारावी में हावर्ड का विद्यार्थी नवनीत रंजन डॉक्यूमेंट्री बनाने के उद्देश्य से आया। यहां आने के बाद क्षेत्र के हालात को देख उसने निर्णय बदला।
– धारावी की लड़कियों को कंप्यूटर कोडिंग और मोबाइल एप मेकिंग सिखाई। यहां सीखने वाली फौजिया असलम अंसारी ने एक ऐसा एप बनाया, जो झुग्गी के नलों में पानी आने का समय बताकर, वर्चुअल कतार में नंबर लगा देता है।
#पर्यावरण – बेंगलुरु में जब एक फ्लाईओवर के निर्माण के लिए शहर के 1800 पुराने पेड़ काटने का फैसला हुआ तो सोशल मिडिया पर अभियान छिड़ा। शहर के 18 हजार युवा पेड़ों को बचाने के लिए सड़क पर आ गए। सरकार को झुकना पड़ा। इंजीनियरों को पेड़ों को नुकसान न पहुंचाने वाला फ्लाईओवर का नक्शा डिजाइन करने के आदेश दिए गए।
#सोशल –
आंध्रप्रदेश के श्रीकांत बोत को अंधत्व के कारण बोर्ड की कक्षा में विज्ञान में एडमिशन नकार दिया गया था। आगे चल कर एमआईटी से शिक्षा लेने वाले श्रीकांत ने भारत में 500 करोड़ की कंपनी बनाई, जहां 70 प्रतिशत कर्मचारी नेत्रहीन है।
#शिक्षा-
मुर्शिदाबाद का 9 वर्षीय बाबर अली, गांव का अकेला ऐसा बालक था, जो शिक्षा लेने के लिए दूर के एक स्कूल जाता था। वापस आकर उसी दिन वो पेड़ के नीचे अपने गांव के बच्चों को पढ़ाता। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद एक संस्था से एक मिलियन डॉलर का पुरस्कार पाने वाले बाबर ने इन पैसों से एक स्कूल खोला, जहां शिक्षा मुफ्त थी। यहां पढ़ने की शर्त सिर्फ इतनी थी कि आप अपने गांव जाकर दूसरों को भी पढ़ाएंगे।
#महिला सुरक्षा-
यही की दूसरी लड़की अंसूजा माधिवाली ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक एप बनाया, जिसमें एक वक्त पर 100 आपातकालीन नंबर सेव करने की सुविधा थी। यह एप मुसीबत में पुलिस थाने को आपकी लोकेशन भी बता देता है।
शिक्षा के बजाय भवन निर्माण पर खर्च होती है शिक्षा निधि
– भाजपा सांसद व लेखक वरुण गांधी का मानना है कि देश में विकास योजनाओं के साथ ही योजनाओं के सही अमल पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
– +शिक्षा मामले पर उन्होंने कहा कि निधि का समुचित इस्तेमाल ही नहीं हो पा रहा है। शैक्षणिक संस्थाओं के भवन निर्माण पर 61 प्रतिशत शिक्षा निधि खर्च हो जाती है, जबकि शिक्षा व्यवस्था पर 3.5 प्रतिशत ही खर्च हो पा रहा है।
– राजनीति व कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए श्री गांधी ने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम पर जोर देना आवश्यक है। प्रशिक्षण के अभाव में किसान कृषि संकट में फंस जाते हैं। राजनीति में शिक्षितों की कमी नहीं है। लेकिन राजनीतिक व्यवस्था के अनुरुप कार्य करने के लिए प्रशिक्षण आवश्यक है।
सामाजिक विषयों पर विचार रखे
शुक्रवार को दैनिक भास्कर के संपादकीय सहयोगियों से चर्चा में श्री गांधी ने राजनीति के अलावा सामाजिक विषयों पर विचार रखे। एक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मंत्री बनना ही उनका लक्ष्य नहीं रहा है। लिहाजा वे अपने स्तर पर सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों को कर्जमुक्त करने व तकनीकी विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा-देश विकास के लिए सभी को सहभागी होना चाहिए।

साढ़े चार हजार करोड़ का ‘एजुकेशन लोन एनपीए’
श्री गांधी ने कहा ‘एजुकेशन लोन’ अर्थात शैक्षणिक ऋण के मामले में भी नीतिगत सुधार की आवश्यकता है। एजुकेशन लोन में एनपीए अर्थात नॉन परफॉर्मिंग एसेट बढ़ता जा रहा है। एजुकेशन लोन का एनपीए साढ़े चार हजार करोड़ तक पहुंच गया है।

पानी और पर्यावरण पर नहीं हो रही चर्चा
उन्होंने कहा कि आज विश्व के साथ देश के दो बड़े मुद्दे हैं जिसमें एक है पानी और दूसरा पर्यावरण। इसी के साथ बढ़ती जनसंख्या भी एक जटिल विषय है। लेकिन दुर्भाग्य से हमारे चर्चा के केंद्र में यह विषय नहीं हुआ करते। इस विषय पर कोई बोलने को तैयार नहीं होता। उन्होंने बताया कि मैं गांव की आर्थिक परिस्थितियों को लेकर एक किताब लिख रहा हूं। इसके लिए महाराष्ट्र का भी दौरा किया। कई नदियों में पानी नहीं होना गंभीर विषय है। भविष्य के लिए निवेश नहीं करना खतरनाक हो सकता है।

सांसद कैसे तय कर सकते हैं अपना वेतन
सांसद अपना वेतन कैसे तय कर सकते हैं। 5 साल में सांसदों का 400 प्रतिशत वेतन बढ़ाया है। पहले सांसद 120 दिन काम किया करते थे, अब 60 दिन कामकाज में भाग लिया जा रहा है। संसद बहस और नीति का केंद्र होना चाहिए न कि राजनीति का अखाड़ा।

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