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बिहार में शिक्षा पर खर्च खूब कर रही सरकार, मगर जमीन पर नहीं दिखती पढ़ाई

पिछले 10 सालों में राज्य के स्कूलों में बच्चों के नामांकन में काफी सुधार हुआ है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे आज भी स्कूल नहीं जाते हैं. पटना. बिहार में 14वें वित्तीय आयोग की अवधि में शिक्षा पर व्यय और कुल व्यय में तो वृद्धि हुई है, लेकिन जमीन पर उसका असर कम ही दिखाई देता है. यह जानकारी एक अध्ययन रपट में सामने आई है. सेंटर फॉर बजट एंड गवर्नेंस अकाउंटबिलिटी और क्राई (Child Rights & You/CRY) द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययन के अनुसार, 2014-15 और 2017-18 केRead More


लोकतंत्र, ओपनियन मेकिंग और जाति!

दिलीप मंडल लोकतंत्र, ओपनियन मेकिंग और जाति! हर पार्टी के नेता ब्राह्मणों को खुश इसलिए नहीं करना चाहते कि उनकी संख्या ज्यादा है. बात संख्या की नहीं है. संख्या सबकुछ नही है.एक ब्राह्मण पूरे गांव या मोहल्ले की ओपिनियन बनाने की क्षमता रखता है. वह पान दुकान में खड़ा होता है, तो अपनी बात आत्मविश्वास से कहता है. बस और ट्रेन में होता है, तो अपनी बात दम के साथ कहता है. झूठ भी आत्मविश्वास के साथ बोलता है.उसकी बात सुनी और मानी जाती है. वह मीडिया में है, फिल्मोंRead More


गोरक्षा का पाखंड !

ध्रुव गुप्त इस देश के हिन्दू संगठनों में गाय के प्रति हिलोरे मार रही करुणा उनकी मानवीय संवेदना की उपज नहीं है। इन संगठनों को पता है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा गोमांस निर्यातक देश है। ज्यादातर हिन्दुओं द्वारा संचालित दर्जनों लाइसेंसी कारखानों में हर दिन हज़ारों गाएं और भैंसे कटती हैं और उनके मांस को अरब और यूरोपीय देशों के नागरिकों के डाइनिंग टेबुल पर परोसा जाता है। उन्हें बंद करने की मांग कभी नहीं उठती। भाजपा शासित प्रदेश गोवा की ‘धर्मनिष्ठ’ सरकार अपने प्रदेश में पर्यटकों को गोमांसRead More


कौन मिटाएगा जाति?

दिलीप मंडल जो बनाता है, वही मिटाता है. जाति तुमने बनाई है. तुम्हीं से मिटवाएंगे. हम लोग मिटा भी नहीं सकते. इसलिए बाबा साहेब ने एनिहिलेशन ऑफ कास्ट का भाषण जात-पाति तोड़क मंडल की सभा के लिए लिखा था. वह अछूतों की सभा नहीं थी.लाहौर के आर्यसमाजियों की सभा थी. बाबा साहेब आर्यसमाजियों को बता रहे थे कि जाति से उनको कितना नुकसान हुआ है. वे किस तरह बीमार हो गए हैं. बाबा साहेब की चिंता ये भी थी कि सवर्ण अपनी बीमारी अपने तक नहीं रखते. वे पूरे देशRead More


नचनियों में ब्राह्मणवाद ; पहले कौन नाचता था, अब कौन नाचता है?

जब तक नाच गाने में पैसा नहीं थीं, तब तक नट और कंजर जैसी जातियों की लड़कियां नाचती थीं. नाचने-गाने वालियों को नीची नजर से देखा जाता था. फिर इस धंधे में पैसा आ गया और फिर इज्जत भी आ गई. कला संगीत अकादमियां बनीं. अरबों का बजट आ गया. नृत्य और संगीत के समूह विदेश यात्रा पर जाने लगे. फिर माधुरी दीक्षित से लेकर अनुष्का शर्मा और सोनल मानसिंह, करीना कपूर और प्रियंका चोपड़ा नाचने लगीं. (शुरुआत शायद शर्मिला टैगोर और हेमा मालिनी के दौर में हुई.) पढ़िए एकRead More


बिरसा मुंडा के जीवन पर फीचर फिल्म बनाएंगे रंजीत

इससे अच्छा क्या होगा कि ये खबर आज महान क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की जयंती पर आई है. कबाली और काला जैसी फिल्मों में चर्चा में आए डायरेक्टर, Pa Ranjith शोषण के खिलाफ विद्रोह के प्रतीक बिरसा मुंडा के जीवन पर फीचर फिल्म बनाएंगे ये फिल्म हिंदी में बनेगी और देश की तमाम भाषाओं में डब की जाएगी. इसके लिए उन्होंने ढेर सारी तैयारियां कर ली हैं. वे लोकेशन से लेकर किरदार तक को समझने की कोशिश कर रहे हैं और इस सिलसिले में आदिवासी जीवन से परिचित हो रहे हैं.Read More


कालजयी है बिरसा की प्रासंकिता 

बिरसा मुंडा की जयंती पर विशेष ललित गर्ग भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे लोकनायक थे जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती ही नहीं दी बल्कि उसे सांसत में डाल दिया। उन्होंने आदिवासी लोगों को अपने मूल पारंपरिक आदिवासी धार्मिक व्यवस्था, संस्कृति एवं परम्परा को जीवंत रखने की प्रेरणा दी। आज आदिवासी समाज का जो अस्तित्वRead More


ऐसा आदिवासी नेता जिन्हें कहा गया भगवान

बिरसा मुण्डा जयंती पर विशेष अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में आदिवासियों की बड़ी भूमिका रही है। चाहे वे बाबा तिलका माझी हों या फिर बिरसा मुंडा। इतिहासकार भले ही कहते रहे कि इनमें से अधिकांश संघर्ष जमीन को लेकर था और आरंभ में इन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम से कोई लेना-देना नहीं था लेकिन सच यही है कि ये सारे आंदोलन शोषण, अंगरेजों और उनके समर्थन कर रहे लोगों के खिलाफ ही थे। अगर बिरसा मुंडा के उलगुलान को ही लें, तो उसी अवधि में देश में अलग-अलग जगहोंRead More


देवी देवता : जिनको पैदा होना था, वो हो लिए

देवी देवता : जिनको पैदा होना था, वो हो लिए कलर प्रिंटिंग प्रेस के कारण देश भर में देवता एक जैसे हो गए. राजा रवि वर्मा ने जैसी पेंटिंग बनाई, उसी के कलेंडर पहली बार बने और अब पूरा देश राम, लक्ष्मी, सरस्वती और कृष्ण को उसी रूप में जानता है, जैसा रवि वर्मा ने बनाया. जिनको पैदा होना था, वो हो लिए फिर कुछ देवता फिल्मों ने दिए. जैसे संतोषी माता और वैष्णो देवी. ये रहे होंगे पहले भी. लेकिन इनको राष्ट्रीय फिल्मों ने बनाया. ऑडियो और वीडिया कैसेट केRead More


अग्नि पुराण में पुआल जलाने की कथा

अग्नि पुराण में पराली या पुआल जलाने की कथा। पंडित वी. एस. पेरियार पराली जलाना किसानों की परंपरा है, कल्चर है, धर्म है, इसे रोकना उनकी आस्था का हनन है. एक बार अग्नि देवता किसानों से नाराज हो गये. उनके शाप से किसानों की फसल तैयार होते ही जल जाती थी. किसानों ने अग्नि देवता को खुश करने के लिए विशाल यज्ञ किया. अग्नि देवता ने प्रसन्न होकर वर दिया कि अब किसानों के अनाज को कोई नुकसान नहीं होगा परंतु किसानों को पराली जलाकर अग्नि देवता की भूख शांतRead More