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नवरात्रि में बलि के नाम अपने ही बेटे के सिर में ठोकी कील 

तांत्रिक दंपती का उठाया खौफनाक कदम अंधविश्वास और आस्था के कॉकटेल में अपने की बेटे की दे दी बलि  बांका। अंधविश्वास के साथ अगर आस्था मिल जाए तो खौफनाक घटनाएं समाने आती हैं। कुछ ऐसा ही हुआ बिहार के बांका जिले के नक्सल प्रभावित बेलहर प्रखंड के टेंगरा गांव में। एक तांत्रिक दंपती ने दुर्गापूजा के अवसर पर तांत्रिक विधि से महाष्टमी पूजा अनुष्ठान करने के अपने चार वर्षीय बेटे के सिर में कील ठोक कर उसकी बलि दे दी। घटना मंगलवार की रात की है। बुधवार की सुबह घटनाRead More


कामसूत्र के देश में मीटू

पुष्यमित्र इस बार मीटू अभियान चल निकला और असर दिखाने लगा है. सवाल कई कथित रूप से समझदार लोगों के दागदार होने का नहीं है. मसला यह है कि लोग अब समझने और सचेत होने लगे हैं कि स्त्रियों के मामले में उनकी हद क्या है. यह अभियान उसी हद को अपने तरीके से परिभाषित कर रहा है. दुखद तथ्य यह है कि भारत जैसे देश में जहां दो हजार साल पहले ही कामसूत्र लिखा चला गया था, वहां यह सब हो रहा है. लोग इतने अनाड़ी हैं कि ठीकRead More


ग्राउंड रिपोर्ट: गुजरात क्यों छोड़ रहे हैं यूपी-बिहार के लोग?

ग्राउंड रिपोर्ट: गुजरात क्यों छोड़ रहे हैं यूपी-बिहार के लोग? भार्गव परीख बीबीसी से साभार  गुजरात में बलात्कार की एक घटना ने ग़ैर-गुजरातियों के लिए हालात मुश्किल कर दिए हैं. साबरकांठा ज़िले में एक ग़ैर-गुजराती को 14 महीने की बच्ची के बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया है. इसके बाद वहां स्थानीय लोगों में उत्तर भारत से आकर रह रहे लोगों के लिए ग़ुस्सा बढ़ रहा है. ज़िले के हिम्मतनगर में रह रहे बाहरी मज़दूरों को शहर छोड़ने की धमकियां दी जा रही हैं. पुलिस के मुताबिक, इस घटनाRead More


लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण क्यों खत्म होना चाहिए

सीटें आरक्षित होने की वजह से अनुसूचित जाति और जनजाति के जो प्रतिनिधि चुनकर आ रहे हैं, वे समुदाय का कोई भी भला नहीं कर सकते. वे पूना पैक्ट की विकलांग संतानें हैं! दिलीप मंडल  3 जुलाई, 2009 को उस समय की बीजेपी सांसद सुमित्रा महाजन अगर लोकसभा में उपस्थिति रही होंगी तो उन्होंने भी अपनी पार्टी के बाकी सांसदों के साथ 95वें संविधान संसोधन विधेयक के समर्थन में वोट डाला होगा. ये संशोधन तमाम दलों की आम सहमति से पारित हुआ था. इस संशोधन के जरिए लोकसभा और विधानसभाओंRead More


अन्नदाता, मैं आपका शुक्रगुजार क्यों हूं?

दिलीप मंडल भारत में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जिन्होंने देश को निराश किया है. नेता-अफसर तो उन लोगों में हैं ही जिनकी वजह से देश आज मानव विकास में दुनिया का सबसे गया-बीता देश है. वैज्ञानिकों ने भी देश को नोबेल पुरस्कारों से निहाल कर दिया हो ऐसा नहीं है. हम आम तौर पर पश्चिम की विकसित की गई टेक्नोलॉजी की नकल करके अपनी पीठ ठोकने वाले देश हैं. हमारी श्रेष्ठ प्रतिभाएं आज भी विदेशी कंपनियों के लिए सस्ता लेबर बनने के लिए मरी जा रही हैं. देशRead More


चरखा है, चश्मा है, टोपी है, लाठी है मगर असहमति का विवेक कहीं खो गया है 

चरखा है, चश्मा है, टोपी है, लाठी है मगर असहमति का विवेक कहीं खो गया है पुष्यमित्र पिछले दिनों मैं सेवाग्राम गया था. वहां जाकर मन प्रसन्न हो गया. महाराष्ट्र के गांवों की पुराने जमाने की वे खपरैल झोपड़ियां आज भी उसी रूप में है, जिस रूप में तब थी जब गांधी जी वहां रहते थे. उनके द्वारा की जाने वाली सर्वधर्म प्राथना की परंपरा भी उसी तरह रोज आज भी जारी है. आश्रम में गांधी जी द्वारा इस्तेमाल की गयी चीजें भी हैं, इनमें वह हॉट लाइन भी है,Read More


डायन बता महिला को खूंटे में बांध निर्वस्त्र कर पीटा

अररिया। बौंसी थाना की पहुंसरा पंचायत के कौवाबाड़ी गांव की एक महिला को कुछ लोगों ने डायन बता कर हाथ पैर बांधकर न सिर्फ पीटा बल्कि उसे निर्वस्त्र भी कर दिया। घटना गुरुवार देर रात की है। घटना के बाद पीड़िता न्याय के लिए तीन दिनों से थाने का चक्कर लगाती रही, लेकिन पुलिस ने रविवार को मामले में केस दर्ज किया है। पीड़िता ने बताया कि वह आंगन में बैठी थी इसी दौरान गांव के मनोज सोरेन, अजित सोरेन, राकेश सोरेन, मंटू सोरेन, तल्लू सोरेन व मुकेश सोरेन तीर,Read More


इमाम हुसैन की शहादत, सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नहीं, पूरी मानवता के लिए हैं प्रेरणा का स्रोत

ध्रुव गुप्त  नेशनल स्पीक से साभार   इस्लामी वर्ष यानी हिजरी सन्‌ के पहले महीने मुहर्रम की शुरुआत हो चुकी है. इस महीने को इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार किया जाता है. अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद ने इसे अल्लाह का महीना कहा है. इस पाक़ माह में रोज़ा रखने की अहमियत बयान करते हुए उन्होंने कहा है कि रमजान के अलावा सबसे अच्छे रोज़े वे होते हैं जो अल्लाह के महीने यानी मुहर्रम में रखे जाते हैं. मुहर्रम के दसवे दिन को यौमें आशुरा कहा जाता हैRead More


समलेंगिकता के बाज़ार का काला कुचक्र

अनुज अग्रवाल अब चूंकि समलेंगिकता को भारत मे कानूनी मान्यता मिल गयी है ऐसे में सोशल मीडिया पर इसका समर्थन करते हजारों वीडियो,यूट्यूब लिंक, फ़ोटो व पोस्ट आनी शुरू हो जाएंगी। नई पीढ़ी इनकी ओर आकर्षित होकर समलैंगिक संबंधों की ओर बढ़ने लगेगी। बाजारू ताकते इनको अब अपने अधिकारों के लिए उकसाने लगेंगी। शादी, बच्चे , संपत्ति व बीमे आदि के हक़ के कानूनों की मांग उठने लगेंगीं। कुछ एनजीओ इनके समर्थन के लिए आगे आने लगेंगी। मीडिया में इनके अधिकारों के लिए नई बहस, आंदोलन व पीआईएल के खेल शुरूRead More


हिंदी महारानी है या नौकरानी ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक आज हिंदी दिवस है। यह कौनसा दिवस है, हिंदी के महारानी बनने का या नौकरानी बनने का ? मैं तो समझता हूं कि आजादी के बाद हिंदी की हालत नौकरानी से भी बदतर हो गई है। आप हिंदी के सहारे सरकार में एक बाबू की नौकरी भी नहीं पा सकते और हिंदी जाने बिना आप देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी बन सकते हैं। इस पर ही मैं पूछता हूं कि हिंदी राजभाषा कैसे हो गई ? आपका राज-काज किस भाषा में चलता है ? अंग्रेजीRead More